No title
जब जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता है तो इंसान रुके हुए पानी के समान हो जाता है । जिस तरह से रुका हुआ पानी अपने अंदर तमाम प्रकार की जिंदगी और शुद्धता का प्रमाण देता है अर्थात लोगों के लिए अनुपयोगी हो जाता है । उसी तरह से मनुष्य की प्रगति भी रुक जाती है ऐसा व्यक्ति समाज और परिवार के लिए अनुपयोगी होता जाता है ।
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