समस्त बेटियों को समर्पित ।।
बालिका दिवस पर समस्त बेटियों को काव्य रूप में कोमल भावनाएं सस्नेह समर्पित।।
।।समस्त बेटियों को काव्यांजलि।।
बेटी है वेद ऋचा सी बेटी है गंगा जल सी।
श्रृद्धा के सुधा सरोवर में बेटी है नील कमल सी।।
बेटी है रामायण सी बेटी माधव की गीता।।
बेटी है उमा रमा सी बेटी विदेह की सीता।।
त्रिभुवन की गौरव गरिमा यह पावन तुलसी दल सी।।
बेटी है वेद ऋचा सी बेटी है गंगा जल सी।।
श्रृद्धा के सुधा सरोवर में बेटी है नील कमल सी।। 1।
इस जग के मरुथल में बेटी है सावन की हरियाली।।
मानव मन के उपवन में यह कल्प वृक्ष की डाली।।
सूने घर में आंगन में छम छम करती पायल सी।।
बेटी है वेद ऋचा सी बेटी है गंगा जल सी।।
ऋद्धा के सुधा सरोवर में बेटी है नील कमल सी।। 2।।
यमुना सी तरल तरंगा यह सरस्वती की धारा।।
सात्विक विवेक पाता है जिसको लख कर जग सारा।।
बापू के सिर की पगड़ी मां के पुनीत आंचल सी।।
बेटी है वेद ऋचा सी बेटी है गंगा जल सी।।
श्रृद्धा के सुधा सरोवर में बेटी है नील कमल सी।। 3।।
कन्या के पद पूजन से है अश्वमेघ फल कमतर।।
बेटी है तो नारायण भी घर आते हैं चलकर ।।
निर्मल,, बेटी बिन सारी दुनिया लगती जंगल सी।।
बेटी है वेद ऋचा सी बेटी है गंगा जल सी।।
ऋद्धा के सुधा सरोवर में बेटी है नील कमल सी।।
जै जानकी जीवन।।
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