राष्ट्र वंदना
गणतंत्र दिवस की आनंत अनंत शुभकामनाओं सहित।।
राष्ट्र वंदना।।
तुझको छूने को हरदम मचलता गगन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।।
तूं हमेशा से दुनीया का सिरमौर है।।
बे वतन के लिए बस यहीं ठौर है।।
तेरी दोनों भुजाएं हैं गंगा जमन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।।1।।
राम का तेरे रग रग में आदर्श है।।
तेरे गौरव का नभ जैसा उत्कर्ष है
।। तुझ पे होता है भगवान का अवतरण।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।। 2।।
तेरी गोदी में मीरा कबीरा पले।।
छोड़ कर के सदन अपना तुलसी चले।।
सिंधु है धो रहा नित्य तेरे चरन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।। 3।।
तेरे सीने मे हनुमान सा जोश है।।
वेद करता सदा तेरी जै घोष है।।
चूमती तुझको सूरज कि पहली किरन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।। 4।।
तूने गौतम गौतम कपिल कृष्ण अर्जुन गढा।।
तेरी गीता को दुनिया ने दिल से पढा।।
विश्व करता युगों से तेरा अनुसरण।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।। 5।।
तेरे बेटे कि है बस यही आरजू।।
हम रहें ना रहें पर फले फू़ले तूं।।
तुदको अर्पण हो देवेन्द्र का तन मन वचन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।। 6।।
तुझको छूने को हरदम मचलता गगन।।
राष्ट्र तुझको नमन राष्ट्र तुझको नमन।।
भारत माता की जय।।
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