एक कविता
तुलना के खेल में
मत उलझो,
क्योंकि इस खेल का
कहीं कोई अंत नही..!
जहाँ तुलना की
शुरुआत होती है,
वही से आनंद और
अपनापन खत्म होता है.....!
मत उलझो,
क्योंकि इस खेल का
कहीं कोई अंत नही..!
जहाँ तुलना की
शुरुआत होती है,
वही से आनंद और
अपनापन खत्म होता है.....!
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